:
Breaking News

जेडीयू ने सांसद गिरिधारी यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग की

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

पटनाः जनता दल (यूनाइटेड) ने अपने सांसद गिरिधारी यादव की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। पार्टी ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है। जेडीयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामैत ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर औपचारिक नोटिस सौंपा है।
सूत्रों के अनुसार, विवाद का मुख्य कारण बिहार विधानसभा चुनाव में गिरिधारी यादव के बेटे का आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ना है। जेडीयू का आरोप है कि सांसद ने अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर अपने बेटे के लिए प्रचार किया। पार्टी इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने पर अड़ी हुई है।
गिरिधारी यादव वर्तमान में बांका लोकसभा क्षेत्र से सांसद हैं। इससे पहले वह बेलहर विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं। सांसद को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी माना जाता रहा है। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी उनके व्यवहार से नाराज है।
बताया जाता है कि गिरिधारी यादव के बेटे चाणक्या प्रकाश रंजन ने बेलहर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में कदम रखा था। उन्हें आरजेडी ने टिकट दिया था। वहीं, इस सीट से एनडीए की ओर से जेडीयू के मनोज यादव उम्मीदवार थे। जेडीयू का आरोप है कि गिरिधारी यादव ने पार्टी लाइन का उल्लंघन कर अपने बेटे के लिए प्रचार किया।
चाणक्या प्रकाश रंजन चुनाव में हार गए। उन्होंने 37,206 वोट हासिल किए, जबकि जेडीयू उम्मीदवार मनोज यादव ने 1,15,393 वोट लेकर जीत दर्ज की। इस परिणाम के बाद जेडीयू का नाराजगी बढ़ गई और सांसद की सदस्यता रद्द करने की मांग सामने आई।
विधानसभा चुनाव से पहले गिरिधारी यादव ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आयोग के निर्देशों को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि यह आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। उन्होंने बताया कि अपने नाम को वोटर लिस्ट में अपडेट कराने में उन्हें 10 दिन लग गए। सांसद ने कहा कि उनके बेटे की अमेरिका में मौजूदगी के कारण दस्तावेज भेजना मुश्किल था। इसके अलावा उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने इतनी बड़ी प्रक्रिया पूरी करने के लिए बहुत कम समय दिया।
गिरिधारी यादव का यह बयान जेडीयू नेतृत्व को मंजूर नहीं था। इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया। पार्टी ने सांसद की सदस्यता रद्द करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जेडीयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामैत ने बताया कि नोटिस में सांसद पर लगाए गए आरोप स्पष्ट रूप से लिखे गए हैं। पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष से मांग की है कि गिरिधारी यादव की सदस्यता रद्द कर उन्हें अनुशासनहीन गतिविधियों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी की यह कार्रवाई राजनीतिक दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह कदम विधानसभा चुनाव के परिणाम और सांसद के बेटे के प्रचार से जुड़े विवाद के बाद उठाया गया है।
इस मामले में सांसद गिरिधारी यादव ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनका कहना है कि वे पार्टी के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे और अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट करेंगे।
जेडीयू का कहना है कि सांसद के व्यवहार ने पार्टी की अनुशासनात्मक प्रक्रिया को चुनौती दी है। पार्टी ने इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक नोटिस देकर कार्रवाई की मांग की है।
गिरिधारी यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग का असर न केवल सांसद पर बल्कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में राजनीतिक परिदृश्य पर भी पड़ सकता है। इससे आगामी समय में लोकसभा में पार्टी की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
बांका लोकसभा क्षेत्र के मतदाता और राजनीतिक विश्लेषक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। उनका मानना है कि सांसद की गतिविधियों और पार्टी के नोटिस से क्षेत्रीय राजनीतिक स्थिति में हलचल देखने को मिल सकती है।
पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह कदम अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन का उल्लंघन मानकर उठाया गया है। सांसद की सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
गिरिधारी यादव ने हाल के चुनाव में अपने बेटे के पक्ष में प्रचार किया था। यह पार्टी विरोधी गतिविधियों के दायरे में आता है। जेडीयू के अनुसार, किसी भी सांसद द्वारा पार्टी के खिलाफ काम करना स्वीकार्य नहीं है।
जेडीयू नेतृत्व ने कहा कि इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए सभी औपचारिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। सांसद को नोटिस मिलने के बाद उनके पक्ष को भी सुना जाएगा।
इस विवाद के चलते राज्य और लोकसभा स्तर पर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। गिरिधारी यादव के मतदाता और समर्थक इस मामले को लेकर चर्चा कर रहे हैं। पार्टी और सांसद के बीच चल रही इस प्रक्रिया को भविष्य में ध्यान से देखा जाएगा।
संसदीय प्रक्रिया के तहत, नोटिस के बाद सांसद को जवाब देने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष के माध्यम से आगे की कार्रवाई तय होगी।
बांका और आसपास के इलाकों में इस मामले को लेकर राजनीतिक पार्टियों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव से जुड़ी यह स्थिति क्षेत्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *